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रींगस में धूमधाम से मनाई ऐतिहासिक होली

रींगस में धूमधाम से मनाई ऐतिहासिक होली

रींगस में धूमधाम से मनाई ऐतिहासिक होली 
मुर्दे की शवयात्रा और दुल्हे की एक-साथ निकाली बारात 
रींगस न्यूज:- ( बी एल सरोज ) देशभर में होली अलग-अलग ढंग से मनाई जा रही है पूरे देश में होली की धूम मची हुई है सब कोई होली के रंगों में डूब जाते हैं वहीं सीकर जिले के रींगस कस्बे में भी ऐतिहासिक होली मनाई गई  यह एतिहासिक होली पिछले 300 सालों से भी ज्यादा समय मनाई जा रही है जिसमें मुर्दे की शव यात्रा और दूल्हे की बारात एक साथ निकाली जाती है गाजे बाजे से निकाली जाने वाले इस यात्रा में हजारों लोग एवं कस्बे वासी इकट्ठा होते हैं एवं साथ-साथ चलते हैं कस्बे के बाबूलाल बावड़ीका ने जानकारी देते हुए बताया कि सैकड़ो वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है  होली के इस स्वरूप के अन्तर्गत सुबह 9:00 बजे कस्बे के चौपड़ बाजार स्थित गोपीनाथ राजा मंदिर के सामने भजन एवं नाच गानों का कार्यक्रम शुरू होता है और होली के रसिया कस्बे वासी विभिन्न लोक गीतों, भजनों  एवं होली के गीतों पर झूमते रहते हैं और जमकर एक दुसरे को रंग और गुलाल लगाते हैं वहीं कुछ वर्षों पहले पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष स्वर्गीय कैलाश पारीक द्वारा एक और नई परंपरा इसमें जोड़ दी गई जिसके अंतर्गत यहां होली खेलने वाले सभी लोगों के लिए गरम पकोड़े और चाय की व्यवस्था भी उनके द्वारा की गई जो अब उनके परिवारजनों द्वारा लगातार निभाई जा रही है ।
दोपहर 1:00 बजे बाद यहीं से शव यात्रा और दूल्हे की बारात शुरू होती है जो , कस्बे के मुख्य मार्गो से होती हुई दशहरा मैदान के शमशान घाट पर जाकर खत्म होती है , हालांकि रास्ते में मुस्लिम समाज की बड़ी मस्जिद भी पड़ती है लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समाज के लोग आपसी सौहार्द को दिखाते हुए किसी भी पक्ष के लिए बाधा खड़ी नहीं करते हैं , और इस बार तो रोजे  भी चल रहे हैं और होली के दिन जुम्मा भी था लेकिन पुलिस प्रशासन की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था एवं वरिष्ठ कस्बेवासियों  द्वारा आपसी सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए शांतिपूर्वक यात्रा इधर मस्जिद के सामने से निकाली गई  । होली में वर्षों से सहभागिता निभा रहे  बुजुर्ग द्वारका प्रसाद बधालका ने जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा में शव यात्रा समाज में व्याप्त बुराइयों का अंत करने की होती है और दूल्हे की बारात वर्ष पर आने वाली खुशियों का प्रतीक होती है । वहीं रघुवीर पारीक और सुरेश कुमार अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि हम सभी लोग मिलकर के पहले तो मुर्दे के लिए आवश्यक  सामान इकट्ठा करते हैं और उसकी अर्थी तैयार की जाती है ,  उसके बाद दूल्हे को तैयार किया जाता है जो घोड़ी या ऊंट पर बैठाकर बारात के रूप में आगे आगे चलता है और पीछे-पीछे मुर्दे की शव यात्रा चलती रहती है ।
प्राचीन परंपरा के अनुसार ही शव का दाह-संस्कार  शमशान घाट पर में करने के बाद सभी लोग वापस गोपीनाथ राजा मंदिर के सामने इकट्ठा होते हैं एक दूसरे को होली की बधाई देते हैं और सब अपने अपने घरों को लौट जाते हैं , उसके बाद  कोई किसी को रंग नहीं लगता है और और फिर दिन भर मिठाई और बधाइयों का दौर चलता रहता है ।
नोट .. सर खबर नाम सहित लगाएं 

B. L. Saroj
Mo. 9413070728

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